डिअर नरेंद्र मोदी,
कांग्रेस और कांग्रेस के अधिकतर नेता राजघरानों,पूंजीवादियों,जमींदारों,सामंतों,अभिजात्यों के घरों में पैदा हुए.उनके अस्तित्व पर हार या जीत का कोई फर्क नही पड़ता पर तुम तो गरीबी में,भुखमरी में,बेरोजगारी में पनपे हो और इसी वजह से तुम पर लोगों ने भरोसा किया,तुम्हे सत्ता दी.तुम कुछ भी बोलो जनता तो उसे सही/गलत के पैमाने ओर तौलेगी ही.इस समय जनता का अपनापन तुम हो.एक बार हार जाओ फिर जनता तुम्हे अस्वीकार करेगी ही. इसलिए कम से कम तुम्हारे खुद के अस्तित्व के लिए तो विकास करना अनिवार्य हो ही गया है.
''पकौड़ा' बेचना भी रोजगार है' ये लाइन फेसबुक/ट्विटर/यूट्यूब पर जोक बनाकर पैसे कमाने वालों के लिए जरूर रोजगार है पर देश की 65 ℅ युवा जनता के लिये एक 'वन लाइनर' जुमले से ज्यादा कुछ नही है.
नोट~ बुद्धिजीवी 'तुम' को 'आप' पढ़ें.
कांग्रेस और कांग्रेस के अधिकतर नेता राजघरानों,पूंजीवादियों,जमींदारों,सामंतों,अभिजात्यों के घरों में पैदा हुए.उनके अस्तित्व पर हार या जीत का कोई फर्क नही पड़ता पर तुम तो गरीबी में,भुखमरी में,बेरोजगारी में पनपे हो और इसी वजह से तुम पर लोगों ने भरोसा किया,तुम्हे सत्ता दी.तुम कुछ भी बोलो जनता तो उसे सही/गलत के पैमाने ओर तौलेगी ही.इस समय जनता का अपनापन तुम हो.एक बार हार जाओ फिर जनता तुम्हे अस्वीकार करेगी ही. इसलिए कम से कम तुम्हारे खुद के अस्तित्व के लिए तो विकास करना अनिवार्य हो ही गया है.
''पकौड़ा' बेचना भी रोजगार है' ये लाइन फेसबुक/ट्विटर/यूट्यूब पर जोक बनाकर पैसे कमाने वालों के लिए जरूर रोजगार है पर देश की 65 ℅ युवा जनता के लिये एक 'वन लाइनर' जुमले से ज्यादा कुछ नही है.
नोट~ बुद्धिजीवी 'तुम' को 'आप' पढ़ें.