An open Letter to Virat Kohli
डिअर विराट कोहली,
मैं जानता हूँ तुम्हारे करोड़ों fans है देश में विदेश मे,उन्ही करोड़ों fans में से एक मैं भी हूँ और 2009 से ही तुम्हारा बहुत बड़ा फैन रहा हूँ,स्कूल,कॉलेज के दिनों से ही तुम्हारे स्टाइलिश फोटो मेरे लैपटॉप,मोबाइल,फेसबुक,इंसटाग्राम,व्हट्सएप्प पर उसी तरह राज कर रहे हैं जैसे तुम विश्व क्रिकेट पर नित-नए रिकॉर्ड तोड़ कर रहे हो.मैं तुम्हारा सबसे बड़ा फैन का दावा करने के लिए यह पोस्ट नही लिख रहा हूँ. सिर्फ इसलिए लिख रहा हूँ क्यूंकि हाल ही में 'नोटबंदी की प्रथम बरसी' पर तुम्हारे एक बयान ने मुझे यह पोस्ट लिखने के लिए मजबूर किया है.तुम्हारा बयान कुछ इस तरह था कि ‘नोटबंदी भारतीय राजनीतिक इतिहास का सबसे महान कदम है'.तुम मोदी जी की नोटबंदी के बारे में ऐसा बयान दे सकते हो क्यूंकि क्रिकेटर भी नागरिक हैं, इसलिए उन्हें उनकी राजनीतिक अभिव्यक्ति के लिए आरोपित नहीं किया जा सकता. क्रिकेटरों और राजनेताओं की गलबहियां कोई नई बात नहीं. कांग्रेस व भाजपा के नेता लंबे समय से क्रिकेट संघों की राजनीति करते रहे हैं. पर इसके बावजूद विराट कोहली तुम्हारा बयान अभूतपूर्व था. इससे पहले कभी किसी क्रिकेटर ने किसी प्रधानमंत्री के कदम पर इतनी जल्दबाजी नहीं दिखाई थी' आखिर हमारे क्रिकेटर राजनीति, इतिहास और अर्थशास्त्र के बारे में जानते ही कितना हैं कि उन्हें ‘नोटबंदी’ जैसे कदम पर ऐसी टिप्पणी का अधिकार मिल जाए ?
तुम्हारे fans तुम्हारी हर चीज को आत्मसात करने की कोसिस करते हैं चाहे वह तुम्हारी हेयर स्टाइल हो, मैदान पर विरोधियों के लिये तुम्हारी आक्रामकता हो,तुम्हारा बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन हो या तुम्हारे बयान हो तुम्हारी हर चीज पर तुम्हारे fans की नजर रहती है.लोग तुम्हारी कही बातों को सीरियसली लेते हैं.तुम्हारा सफल व्यक्ति होना ही इसकी वजह भी है.एक जिम्मेदार व्यक्ति होने के नाते बिना रिसर्च के इतना बड़ा बयान कैसे दे सकते हो ? खासकर ऐसे वक़्त में जब अच्छे से अच्छे अर्थशास्त्री भी नोटबंदी को या तो असफल बता चुके है या इसके बारे में खुलकर बोलने से बचते हैं.
कहीं मोदी जी के 'भक्तों' पर तुम्हारी नजर तो नही, क्या तुम उन्हें भी अपना फैन बनाकर अपना सोशल मीडिया पर सामाजिक आधार तो तैयार नही कर रहे ? तुम्हारे इस बयान से राजनीतिक बदबू आ रही है.
नोटबन्दी के बारे में सबकुछ जानते हुए भी आलोचना न करना यह निजी साहस में कमी का मामला भी है, जो हमारे सेलेब्रेटी को भी खुलने से रोकती है. एक बार प्रसिद्धि या धन, या फिर दोनों कमा लेने के वालों को यह सब गंवाने का डर सताने लगता है इसीलिए सच बोलने में डर लगता है.और हाँ अब अगर तुम्हे नोट और बंदी दोनों मिल ही गयी हैं तो नोटबंदी का समर्थन करना बंद करो विराट.
मैं जानता हूँ तुम्हारे करोड़ों fans है देश में विदेश मे,उन्ही करोड़ों fans में से एक मैं भी हूँ और 2009 से ही तुम्हारा बहुत बड़ा फैन रहा हूँ,स्कूल,कॉलेज के दिनों से ही तुम्हारे स्टाइलिश फोटो मेरे लैपटॉप,मोबाइल,फेसबुक,इंसटाग्राम,व्हट्सएप्प पर उसी तरह राज कर रहे हैं जैसे तुम विश्व क्रिकेट पर नित-नए रिकॉर्ड तोड़ कर रहे हो.मैं तुम्हारा सबसे बड़ा फैन का दावा करने के लिए यह पोस्ट नही लिख रहा हूँ. सिर्फ इसलिए लिख रहा हूँ क्यूंकि हाल ही में 'नोटबंदी की प्रथम बरसी' पर तुम्हारे एक बयान ने मुझे यह पोस्ट लिखने के लिए मजबूर किया है.तुम्हारा बयान कुछ इस तरह था कि ‘नोटबंदी भारतीय राजनीतिक इतिहास का सबसे महान कदम है'.तुम मोदी जी की नोटबंदी के बारे में ऐसा बयान दे सकते हो क्यूंकि क्रिकेटर भी नागरिक हैं, इसलिए उन्हें उनकी राजनीतिक अभिव्यक्ति के लिए आरोपित नहीं किया जा सकता. क्रिकेटरों और राजनेताओं की गलबहियां कोई नई बात नहीं. कांग्रेस व भाजपा के नेता लंबे समय से क्रिकेट संघों की राजनीति करते रहे हैं. पर इसके बावजूद विराट कोहली तुम्हारा बयान अभूतपूर्व था. इससे पहले कभी किसी क्रिकेटर ने किसी प्रधानमंत्री के कदम पर इतनी जल्दबाजी नहीं दिखाई थी' आखिर हमारे क्रिकेटर राजनीति, इतिहास और अर्थशास्त्र के बारे में जानते ही कितना हैं कि उन्हें ‘नोटबंदी’ जैसे कदम पर ऐसी टिप्पणी का अधिकार मिल जाए ?
तुम्हारे fans तुम्हारी हर चीज को आत्मसात करने की कोसिस करते हैं चाहे वह तुम्हारी हेयर स्टाइल हो, मैदान पर विरोधियों के लिये तुम्हारी आक्रामकता हो,तुम्हारा बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन हो या तुम्हारे बयान हो तुम्हारी हर चीज पर तुम्हारे fans की नजर रहती है.लोग तुम्हारी कही बातों को सीरियसली लेते हैं.तुम्हारा सफल व्यक्ति होना ही इसकी वजह भी है.एक जिम्मेदार व्यक्ति होने के नाते बिना रिसर्च के इतना बड़ा बयान कैसे दे सकते हो ? खासकर ऐसे वक़्त में जब अच्छे से अच्छे अर्थशास्त्री भी नोटबंदी को या तो असफल बता चुके है या इसके बारे में खुलकर बोलने से बचते हैं.
कहीं मोदी जी के 'भक्तों' पर तुम्हारी नजर तो नही, क्या तुम उन्हें भी अपना फैन बनाकर अपना सोशल मीडिया पर सामाजिक आधार तो तैयार नही कर रहे ? तुम्हारे इस बयान से राजनीतिक बदबू आ रही है.
नोटबन्दी के बारे में सबकुछ जानते हुए भी आलोचना न करना यह निजी साहस में कमी का मामला भी है, जो हमारे सेलेब्रेटी को भी खुलने से रोकती है. एक बार प्रसिद्धि या धन, या फिर दोनों कमा लेने के वालों को यह सब गंवाने का डर सताने लगता है इसीलिए सच बोलने में डर लगता है.और हाँ अब अगर तुम्हे नोट और बंदी दोनों मिल ही गयी हैं तो नोटबंदी का समर्थन करना बंद करो विराट.
~ तुम्हारे खेल को बहुत नजदीक से देखने वाला एक अदना सा फैन